स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को झटका: कोर्ट ने दिलाया ₹2.10 लाख का कोरोना रक्षक क्लेम | Khabar For You
- Adv_Prathvi Raj
- 05 Feb, 2026
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05 फरवरी 2026 बीमाधारकों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए माननीय स्थाई लोक अदालत ने स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि मरीज की गंभीरता और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत का फैसला केवल डॉक्टर ही ले सकता है।
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दिनांक 03.02.2026 को माननीय न्यायालय स्थाई लोक अदालत द्वारा एक जजमेंट दिया गया जिसमें स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी द्वारा वादी का कोरोना रक्षक पॉलिसी के अंतर्गत क्लेम रिजेक्ट करते हुए कंपनी के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह Argument किया गया कि वादी को माइनर कोरोना हुआ था , हॉस्पिटल में Admit होने की जरूरत नहीं थी घर पर ही Qurantine रहते हुए दवाई लेनी थी, जिस पर वादी के विद्वान अधिवक्ता वरुण शर्मा द्वारा अपने Argument में यह तर्क दिया गया कि वादी की pcr report positive थी, व वादी को 7 दिन के लिए जीवन रक्षा हॉस्पिटल में भर्ती होना पड़ा था, जिसके संपूर्ण दस्तावेज माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर एक्जीबिट कराए जा चुके है, एवं पेशेंट को कब हॉस्पिटल में भर्ती करना है या नहीं ये इंश्योरेंस कंपनी बताने वाली कौन होती है, ये तो डॉक्टर ओर पेशेंट की कंडीशन पर निर्भर करता है, ओर मेरे क्लाइंट की कंडीशन उसके ऑक्सीजन लेवल से पता किया जा सकता है, मेरे क्लाइंट को heavy does antibiotics, remdisiver, dexona injection दिये गए है व ऑक्सीजन लेवल 92 था, तो पेशेंट की स्थिति का अंदाजा कोर्ट भी लगा सकती है, जिस पर माननीय न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए वादी को 2,10,000 का क्लेम स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी से दिलाया गया, उक्त मुकदमे में वादी की तरफ से पैरवी विद्वान अधिवक्ता वरुण शर्मा द्वारा की गई.
क्या था पूरा मामला? वादी ने कोरोना रक्षक पॉलिसी के तहत क्लेम पेश किया था, जिसे कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि "कोरोना माइनर (सामान्य) था और घर पर क्वारंटाइन रहकर इलाज संभव था।" कंपनी के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होना अनावश्यक था।
अधिवक्ता वरुण शर्मा की दमदार दलीलें: वादी की ओर से पैरवी करते हुए विद्वान अधिवक्ता वरुण शर्मा ने अदालत के सामने अकाट्य तर्क रखे:
मेडिकल साक्ष्य: PCR रिपोर्ट पॉजिटिव थी और मरीज 7 दिन तक जीवन रक्षा अस्पताल में भर्ती रहा।
गंभीर स्थिति: मरीज का ऑक्सीजन लेवल (SpO2) 92 तक गिर गया था।
इलाज का स्तर: मरीज को रेमडेसिविर (Remdesivir) और डेक्सोना जैसे हैवी एंटीबायोटिक इंजेक्शन दिए गए थे।
अधिकार क्षेत्र: एडवोकेट शर्मा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि - "इंश्योरेंस कंपनी यह बताने वाली कौन होती है कि मरीज को कब भर्ती होना है? यह विशुद्ध रूप से डॉक्टर और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।"
अदालत का फैसला: तर्कों और दस्तावेजों से सहमत होते हुए, माननीय न्यायालय ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को आदेश दिया कि वह वादी को ₹2,10,000 के क्लेम का भुगतान तुरंत करे।
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