प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा: 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' निवेश का नारा

- Khabar Editor
- 29 Aug, 2025
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जापान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापानी व्यापारिक नेताओं से "भारत में निर्माण करें, दुनिया के लिए निर्माण करें" का जोरदार आह्वान किया है। टोक्यो में भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अभूतपूर्व परिवर्तन और उसकी बढ़ती आर्थिक क्षमता पर प्रकाश डाला, जिससे देश एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है। यह यात्रा, जो उनकी जापान की आठवीं और नवनियुक्त समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ पहली यात्रा है, दोनों देशों के बीच "विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी" को और गहरा करने के उद्देश्य से है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान संबंधों की मज़बूत नींव पर ज़ोर दिया और कहा कि जापानी कंपनियाँ पहले ही भारत में 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुकी हैं। उन्होंने भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता, नीतिगत पारदर्शिता और पूर्वानुमानशीलता को दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उसकी स्थिति को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों के रूप में इंगित किया। उन्होंने एक सर्वेक्षण के उत्साहजनक आँकड़े भी साझा किए, जिसमें कहा गया था कि भारत में 80% जापानी कंपनियाँ अपने परिचालन का विस्तार करना चाहती हैं, जिनमें से 75% पहले ही लाभ कमा रही हैं।
यह यात्रा निक्केई एशिया से प्राप्त रिपोर्टों के बीच हो रही है कि जापान अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन (68 बिलियन डॉलर) का एक महत्वपूर्ण निवेश पैकेज तैयार कर रहा है। यह निवेश रणनीतिक रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, पर्यावरण और चिकित्सा जैसे उच्च-तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। इस कदम को आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के एक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
इस यात्रा के एजेंडे का एक प्रमुख आकर्षण तकनीकी सहयोग की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी ने "इस सदी की तकनीकी क्रांति" को गति देने के लिए "जापान की तकनीक और भारत की प्रतिभा" के संयोजन की सहक्रियात्मक क्षमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सफल साझेदारी का उल्लेख किया और बैटरी, रोबोटिक्स और परमाणु ऊर्जा जैसे अन्य आधुनिक उद्योगों में भी इसे अपनाने का आग्रह किया।
आर्थिक मंच के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम में टोक्यो इलेक्ट्रॉन फ़ैक्टरी और सेंडाई स्थित तोहोकू शिंकानसेन प्लांट का दौरा भी शामिल है, जहाँ बुलेट ट्रेन के डिब्बों का निर्माण होता है। यात्रा के इस चरण में, जिसमें श्री इशिबा भी शामिल होंगे, भारत की हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की निरंतर भागीदारी पर चर्चा को आगे बढ़ाने की उम्मीद है, जो उनके द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख प्रतीक है। दोनों नेताओं के बीच वार्ता में द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण आयाम की समीक्षा की जाएगी, जिसमें रक्षा एवं सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी और लोगों के बीच आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
समाचार के बिंदु
- प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा: प्रधानमंत्री मोदी अपने जापानी समकक्ष, प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ शिखर सम्मेलन के लिए टोक्यो की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना हुए हैं। यह 15वां भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन और प्रधानमंत्री मोदी की इस देश की आठवीं यात्रा है।
- भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में मुख्य भाषण: प्रधानमंत्री मोदी ने मंच को संबोधित करते हुए जापानी व्यापारिक नेताओं को "आओ भारत में निर्माण करें, दुनिया के लिए निर्माण करें" के नारे के साथ आमंत्रित किया। उन्होंने भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि और स्थिरता का हवाला देते हुए उसे एक आदर्श निवेश गंतव्य बताया।
- भारत की आर्थिक मजबूती और स्थिरता: प्रधानमंत्री ने पिछले 11 वर्षों में भारत में हुए अभूतपूर्व परिवर्तन पर प्रकाश डाला, जिसकी विशेषता राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता, पारदर्शी नीतियाँ और पूर्वानुमानशीलता है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।
- उत्साहजनक निवेश वातावरण: प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में जापानी व्यवसायों के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत देने वाले आँकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि 80% जापानी कंपनियाँ अपनी उपस्थिति बढ़ाने में रुचि रखती हैं, और 75% पहले से ही लाभ कमा रही हैं। उन्होंने यह मुहावरा गढ़ा, "भारत में, पूँजी केवल बढ़ती नहीं है; बल्कि कई गुना बढ़ती है।"
- जापान की ओर से महत्वपूर्ण निवेश प्रतिज्ञा: निक्केई एशिया की रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि जापान अगले दशक में भारत के लिए 10 ट्रिलियन येन ($68 बिलियन) की निवेश योजना की घोषणा करने वाला है। यह निवेश प्रमुख विकास क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
- उच्च-तकनीकी क्षेत्रों पर ध्यान: घोषित जापानी निवेश अत्याधुनिक उद्योगों, जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालक, पर्यावरण और चिकित्सा, पर केंद्रित होगा। यह भारत के तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता के प्रयासों के अनुरूप है।
- प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का तालमेल: प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की पूरक शक्तियों पर ज़ोर देते हुए कहा कि "जापान की प्रौद्योगिकी और भारत की प्रतिभा मिलकर इस सदी की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सकती हैं।" उन्होंने रोबोटिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी ऑटोमोबाइल उद्योग की सफल साझेदारी को दोहराने का आग्रह किया।
- बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाना: प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सेंडाइ स्थित तोहोकू शिंकानसेन संयंत्र का दौरा है। प्रधानमंत्री इशिबा के साथ, इस यात्रा से भारत के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क में जापान की भागीदारी पर चर्चा को आगे बढ़ाने की संभावना है, जो उनकी दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है।
समाचार के उप-बिंदु
- यात्रा का उद्देश्य: यह दो दिवसीय यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपने जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा के साथ शिखर वार्ता करने और "विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी" की समीक्षा करने और उसे आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में संबंधों को मज़बूत करना है।
- जापानी व्यवसायों के लिए आर्थिक पहल: भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच में, प्रधानमंत्री मोदी ने अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका यह कथन, "भारत में, पूंजी केवल बढ़ती ही नहीं; बल्कि कई गुना बढ़ती है," निवेशकों के लिए एक सीधा आह्वान था, जिसमें भारतीय बाजार में निवेश पर उच्च प्रतिफल की संभावना पर प्रकाश डाला गया।
- नीतिगत सुधार और व्यापार में आसानी: प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रयास को भारत के "सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन" दृष्टिकोण के संदर्भ से बल मिला। उन्होंने उन नीतिगत सुधारों पर प्रकाश डाला जिन्होंने राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता, पारदर्शिता और पूर्वानुमानशीलता पैदा की है, जो सभी विदेशी निवेश के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- उच्च-मूल्य वाला जापानी निवेश: जापान से कथित तौर पर 10 ट्रिलियन येन का निवेश भारत के आर्थिक परिदृश्य को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देता है। एआई, सेमीकंडक्टर और अन्य आधुनिक क्षेत्रों पर ध्यान पारंपरिक विनिर्माण से उच्च-तकनीकी सहयोग की ओर बदलाव का संकेत देता है, जो भारत की नवाचार का वैश्विक केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है।
- भारत में जापानी कंपनियों की भूमिका: यह तथ्य कि भारत में 75% जापानी कंपनियाँ लाभ कमा रही हैं और 80% विस्तार करना चाहती हैं, भारतीय बाजार में सफलता और विश्वास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस डेटा का उपयोग नए और मौजूदा व्यवसायों को भारत में दीर्घकालिक उपस्थिति के लिए प्रतिबद्ध करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किया।
- रणनीतिक तकनीकी सहयोग: जापानी तकनीक और भारतीय प्रतिभा की संयुक्त क्षमता पर ज़ोर इस साझेदारी का एक प्रमुख रणनीतिक तत्व है। यह सहयोग न केवल आर्थिक विकास के लिए है, बल्कि दोनों देशों को प्रौद्योगिकी के भविष्य में अग्रणी के रूप में स्थापित करने के लिए भी है, जिसमें "ग्लोबल साउथ" के विकास में योगदान करने की क्षमता है।
- बुनियादी ढाँचा और गतिशीलता साझेदारी: तोहोकू शिंकानसेन संयंत्र का दौरा बुनियादी ढाँचा सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। बुलेट ट्रेनों में जापान की विशेषज्ञता द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला है, और यह नियोजित यात्रा भारत की हाई-स्पीड रेल परियोजना की निरंतर प्रगति की दिशा में एक ठोस कदम है।
- सहयोग के दायरे का विस्तार: समाचार रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यह साझेदारी आर्थिक मामलों से आगे भी फैली हुई है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री इशिबा की वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर भी चर्चा होगी, जो एक अधिक व्यापक और रणनीतिक गठबंधन का प्रतीक है।
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