चोरी हुए फोन की बरामदगी के लिए मुंबई पुलिस का सक्रिय दृष्टिकोण
- DIVYA MOHAN MEHRA
- 25 Aug, 2025
- 97951
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मुंबई पुलिस ने शहर में मोबाइल फ़ोन चोरी की व्यापक समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण और बेहद सफल अभियान शुरू किया है। प्रतिक्रियात्मक रुख़ से सक्रिय रुख़ अपनाकर, विभाग चोरी हुए उपकरणों की बरामदगी में नाटकीय वृद्धि देख रहा है। 18 जून को लागू किया गया यह रणनीतिक बदलाव एक अनूठी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया पर केंद्रित है जो एक केंद्रीय रजिस्ट्री और पुलिस बल के भीतर जवाबदेही के एक नए ढाँचे का लाभ उठाती है। इस अभियान की सफलता सिर्फ़ आँकड़ों तक सीमित नहीं है; यह एक ऐसे अपराध से सीधे तौर पर निपटकर जनता का विश्वास और सद्भावना बनाने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है जो आम नागरिकों को असमान रूप से प्रभावित करता है।
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इस नई पहल से पहले, मोबाइल फ़ोन चोरी के शिकार व्यक्ति के लिए यह प्रक्रिया अक्सर निराशाजनक और अंततः निरर्थक होती थी। चोरी हुए उपकरणों को ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक सरकारी पोर्टल, सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (CEIR), 17 सितंबर, 2019 से अस्तित्व में है। हालाँकि, संस्थागत प्राथमिकता की कमी और पुलिस थानों के बीच एक खंडित, अव्यवस्थित दृष्टिकोण के कारण इसकी प्रभावशीलता सीमित थी। कई अधिकारी नियमित रूप से पोर्टल का उपयोग नहीं करते थे, और चोरी हुए मोबाइल की बरामदगी को अक्सर कम प्राथमिकता वाला कार्य माना जाता था, जो अधिक गंभीर अपराधों की उलझन में कहीं खो जाता था। परिणामस्वरूप, पीड़ितों को शायद ही कभी अपने फोन वापस मिलते थे, और चोरी करने वाले अपराधियों को बहुत कम या कोई परिणाम भुगतना पड़ता था। मुंबई पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के नए निर्देश ने इस "मानसिकता" को मौलिक रूप से बदल दिया है।
नई रणनीति का मूल कई प्रमुख नीतिगत बदलावों पर आधारित है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम चोरी हुए फोन की बरामदगी को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाना था। यह विभाग के उच्चतम स्तरों से एक स्पष्ट संकेत था कि इस अपराध को अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा। दूसरे, प्रक्रिया को ही पूरी तरह से नया रूप दिया गया। इसमें न केवल CEIR पोर्टल के उपयोग को प्रोत्साहित करना शामिल था, बल्कि पूरे ऑपरेशन के प्रबंधन के लिए एक समर्पित ढाँचा भी स्थापित करना शामिल था। इस ढाँचे में प्रत्येक पुलिस स्टेशन पर एक विशिष्ट, समर्पित अधिकारी को मोबाइल फोन बरामदगी का प्रभारी नियुक्त करना शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि एक ही व्यक्ति जवाबदेह हो और इस प्रक्रिया में विशेषज्ञ बन सके, बजाय इसके कि यह कार्य कई अधिकारियों के लिए एक अलग कर्तव्य बनकर रह जाए।
इसके अलावा, कमान और जवाबदेही की एक नई श्रृंखला स्थापित की गई है। पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) को अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, और साइबर डीसीपी को पूरे अभियान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इससे सड़क स्तर के अधिकारी से लेकर वरिष्ठ नेतृत्व तक, ज़िम्मेदारी की एक स्पष्ट रेखा बन जाती है। पूरी प्रक्रिया अब संयुक्त आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम की प्रत्यक्ष निगरानी में है, जो नियमित अपडेट मांगती हैं और अगर वसूली दर कम होती है तो पुलिस थानों से पूछताछ करती हैं। एक अधिकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के इस निरंतर पर्यवेक्षण और दबाव से "ज़मीन-आसमान का फ़र्क़" पड़ा है। इसने दृष्टिकोण को एक निष्क्रिय प्रणाली से एक सक्रिय, परिणाम-उन्मुख प्रणाली में बदल दिया है।
सीईआईआर पोर्टल की दक्षता इस सफलता के पीछे तकनीकी इंजन है। यह पोर्टल प्रत्येक मोबाइल फ़ोन के लिए विशिष्ट 15-अंकीय अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमईआई) नंबर का लाभ उठाकर काम करता है। जब कोई पीड़ित अपने फ़ोन के चोरी होने की सूचना देता है, तो पुलिस उसका आईएमईआई नंबर सीईआईआर पोर्टल में दर्ज करती है। यह कार्रवाई डिवाइस को चिह्नित करती है और सभी दूरसंचार ऑपरेटरों को उसके सिम कार्ड को लॉक और निष्क्रिय करने का निर्देश देती है। यह सिस्टम चोरी हुए डिवाइस के चालू होने और नया सिम कार्ड डालने पर तुरंत अलर्ट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस सूचना से पुलिस न केवल फ़ोन के नए स्थान की, बल्कि मोबाइल नंबर और कुछ मामलों में, उसका उपयोग करने वाले व्यक्ति का नाम और पता भी तुरंत पहचान लेती है।
यहीं पर मुंबई पुलिस का अभिनव मानवीय पहलू काम आता है। सूचना मिलने पर, प्रभारी अधिकारी सबसे पहले नए सिम कार्ड धारक को कॉल करने का प्रयास करता है। हालाँकि, एक बड़ी चुनौती यह है कि दूसरी तरफ़ वाला व्यक्ति अक्सर फ़ोन काट देता है या भाषा संबंधी समस्या होती है, क्योंकि चोरी किए गए फ़ोन अक्सर देश के अन्य हिस्सों में व्यक्तियों को बेचे जाते हैं। यह एक सामान्य घटना है, क्योंकि फ़ोन चुराने वाले आपराधिक नेटवर्क अक्सर उन्हें अपराध स्थल से दूर ले जाते हैं ताकि उनका पता लगाना मुश्किल हो जाए।
- इस समस्या से निपटने के लिए, पुलिस ने एक चतुर और बेहद कारगर अगला कदम उठाया है: एक स्वचालित संदेश। यह संदेश चोरी हुए फ़ोन के नए उपयोगकर्ता को भेजा जाता है, जिसमें उन्हें सूचित किया जाता है कि उनके पास जो डिवाइस है वह चोरी की वस्तु है। संदेश में एक स्पष्ट चेतावनी दी जाती है: फ़ोन पुलिस को लौटा दें, और उनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। हालाँकि, यह उन्हें यह भी चेतावनी देता है कि ऐसा न करने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाएगा। यह संदेश यथासंभव कम धमकी भरा होने के साथ-साथ कानूनी अधिकार का भी एहसास दिलाता है। इसमें संपर्क करने के लिए पुलिस स्टेशन के नामित अधिकारी का नाम भी दिया गया है और शहर से बाहर रहने वालों के लिए कूरियर का विकल्प भी दिया गया है।
- यह रणनीति एक महत्वपूर्ण व्यवहारिक अंतर्दृष्टि का लाभ उठाती है: ज़्यादातर लोग जिनके पास चोरी का फ़ोन होता है, वे असली चोर नहीं होते। उन्होंने संभवतः अनजाने में ही फ़ोन हासिल कर लिया होगा, या तो किसी तीसरे पक्ष से ख़रीदकर या उसे पाकर। आपराधिक मामले की आशंका होने पर, कई लोग सहयोग करना चुनते हैं। जैसा कि रिपोर्ट में बताया गया है, संदेश प्राप्त करने वाले कई उपयोगकर्ता पुलिस स्टेशन को वापस कॉल करते हैं और दावा करते हैं कि उन्हें फ़ोन मिल गया है और वे उसे केवल अपने पास रखे हुए थे, और उसका कोई दुर्भावनापूर्ण उपयोग करने का इरादा नहीं था। कुछ मामलों में, वे बस पुलिस स्टेशन पहुँच जाते हैं और डिवाइस वापस कर देते हैं। ऐसे मामलों में, पुलिस व्यक्ति की पहचान और आपराधिक इतिहास की पुष्टि करती है। अगर उन्हें ऐसे अपराधों का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो वे चेतावनी जारी करते हैं और व्यक्ति को जाने देते हैं। सद्भावनापूर्वक वापसी के लिए यह "बिना किसी सवाल के" दृष्टिकोण एक शक्तिशाली प्रोत्साहन है जो उच्च वसूली दर में सहायक रहा है।
इस पहल की सफलता "मोबाइल वापसी समारोह" से स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होती है, जो अब शहर भर के पुलिस थानों में हर दूसरे हफ़्ते आयोजित किए जाते हैं। ये समारोह, जहाँ बरामद फ़ोन उनके आभारी मालिकों को वापस सौंपे जाते हैं, पुलिस विभाग की नई प्रतिबद्धता का एक सार्वजनिक प्रमाण हैं। पीड़ितों को उनके मूल्यवान और डेटा-समृद्ध डिवाइस वापस मिलने का दृश्य न केवल उनके लिए एक संतुष्टि का एहसास देता है, बल्कि मुंबई पुलिस के बारे में जनता की धारणा को भी काफ़ी मज़बूत करता है। यह आम आदमी को यह साबित करता है कि पुलिस केवल हाई-प्रोफाइल अपराधों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करती, बल्कि उन रोज़मर्रा के मुद्दों को भी सुलझाने के लिए समर्पित है जो उनके जीवन को सबसे ज़्यादा प्रभावित करते हैं।
- अंततः, मुंबई पुलिस का नया मोबाइल फ़ोन रिकवरी अभियान रणनीतिक प्राथमिकता, तकनीकी एकीकरण और चतुर व्यवहारिक प्रोत्साहनों के संयोजन के माध्यम से प्रभावी कानून प्रवर्तन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। एक सरल, लेकिन प्रभावशाली नीतिगत बदलाव और जवाबदेही की स्पष्ट रेखाएँ स्थापित करके, विभाग ने अपराध के एक पहले से उपेक्षित क्षेत्र को एक बड़ी सफलता की कहानी में बदल दिया है। CEIR पोर्टल के उपयोग और अनजाने में चोरी हुए फ़ोन प्राप्त करने वालों से निपटने के व्यावहारिक दृष्टिकोण ने दोनों पक्षों के लिए एक जीत वाली स्थिति पैदा की है: पीड़ितों को उनकी संपत्ति वापस मिल जाती है, और पुलिस को जनता का बहुमूल्य विश्वास और एक ऐसी शक्ति होने की प्रतिष्ठा मिलती है जो वास्तव में आम आदमी की सेवा करती है।
समाचार रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि कैसे मुंबई पुलिस ने चोरी हुए मोबाइल फ़ोनों की बरामदगी को प्राथमिकता देकर और एक अधिक कुशल प्रणाली लागू करके उनकी संख्या में उल्लेखनीय सुधार किया है। इस सफलता का श्रेय एक नई, सुव्यवस्थित प्रक्रिया, केंद्रीय रजिस्ट्री के बेहतर उपयोग और अधिकारियों की बढ़ी हुई जवाबदेही को दिया जाता है।
समाचार के मुख्य बिंदु
- प्राथमिकता में बदलाव: 18 जून के एक निर्देश के बाद से मुंबई पुलिस ने चोरी हुए फ़ोनों की बरामदगी को सर्वोच्च प्राथमिकता बना दिया है। इस बदलाव का कारण यह धारणा है कि पीड़ितों को फ़ोन लौटाने से जनता में सद्भावना बढ़ती है।
- प्रणालीगत परिवर्तन: इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए कई उपाय लागू किए गए, जिनमें साइबर पुलिस की भागीदारी और अपने-अपने क्षेत्रों में पुलिस उपायुक्तों (डीसीपी) को इस अभियान के लिए ज़िम्मेदार बनाना शामिल है।
- केंद्रीकृत तकनीक: पुलिस अब दूरसंचार विभाग द्वारा 2019 में शुरू किए गए पोर्टल, केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (सीईआईआर) का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रही है। यह प्रणाली फ़ोनों को उनके विशिष्ट अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (आईएमईआई) नंबर के आधार पर ट्रैक करती है।
- स्वचालित संचार: जब चोरी हुए फ़ोन को CEIR सिस्टम में चिह्नित किया जाता है और नया सिम डाला जाता है, तो पोर्टल पुलिस को सूचित करता है। अधिकारी शुरुआत में नए उपयोगकर्ता को कॉल करते हैं, लेकिन अगर कॉल असफल होती है, तो एक स्वचालित संदेश भेजा जाता है। यह संदेश उपयोगकर्ता को सूचित करता है कि फ़ोन वापस करने पर अपराध दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है।
- वापसी को प्रोत्साहित करना: उनके ख़िलाफ़ पुलिस मामला दर्ज न होने का वादा लोगों को फ़ोन वापस करने के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन देता है, जिसके बारे में वे अक्सर दावा करते हैं कि उन्हें मिल गया है। यह तरीका कारगर है क्योंकि ज़्यादातर पीड़ित आरोप लगाने की बजाय अपना फ़ोन वापस पाने में ज़्यादा रुचि रखते हैं।
- जवाबदेही और निगरानी: नई प्रक्रिया के तहत प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक विशिष्ट अधिकारी को मोबाइल फ़ोन रिकवरी का प्रभारी नियुक्त किया गया है। ज़ोनल डीसीपी रिकवरी दरों के लिए ज़िम्मेदार हैं, जबकि साइबर डीसीपी नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। पूरी प्रक्रिया की निगरानी संयुक्त आयुक्त (अपराध) द्वारा की जाती है। इस निरंतर निगरानी और समर्पित कर्मियों ने रिकवरी दरों में उल्लेखनीय सुधार किया है।
उप-बिंदु और अतिरिक्त विवरण
- CEIR पोर्टल: CEIR पोर्टल चोरी हुए फ़ोन का IMEI नंबर दर्ज करने और उसे चिह्नित करने के बाद उसके सिम कार्ड को निष्क्रिय कर देता है। जब कोई नया सिम इस्तेमाल किया जाता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से उसका पता लगा लेता है और पुलिस को सूचित करता है।
- संदेशों पर उपयोगकर्ता की प्रतिक्रिया: स्वचालित संदेश प्राप्त होने के बाद, चोरी हुए फ़ोन रखने वाले कई लोग पुलिस स्टेशन से संपर्क करते हैं। वे अक्सर दावा करते हैं कि उन्हें फ़ोन मिल गया था और वे उसे मालिक का पता लगाने की उम्मीद में रख रहे थे। पुलिस उनसे पूछताछ करती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनका ऐसे अपराधों से संबंधित कोई आपराधिक इतिहास तो नहीं है, फिर उन्हें चेतावनी देकर जाने देती है।
- सार्वजनिक वापसी समारोह: सफल पुनर्प्राप्ति अभियान के परिणामस्वरूप, मुंबई भर के पुलिस स्टेशन हर दो हफ़्ते में "मोबाइल वापसी समारोह" आयोजित कर रहे हैं ताकि बरामद फ़ोन उनके असली मालिकों को सौंपे जा सकें।
- जनता का विश्वास निर्माण: मुंबई पुलिस आयुक्त, देवेन भारती ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि चोरी हुए फ़ोनों का पता लगाने को प्राथमिकता देना जनता के साथ विश्वास और सद्भावना बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल है।
- पर्यवेक्षण का प्रभाव: एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सबसे बड़ा बदलाव "निरंतर पर्यवेक्षण" और एक "समर्पित प्रभारी व्यक्ति" का होना रहा है, जिससे पुनर्प्राप्ति प्रयासों में "बहुत बड़ा बदलाव" आया है। यह पहल की सफलता में संस्थागत ध्यान और निगरानी के महत्व को उजागर करता है।
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